Page 1 of 2

मध्यप्रदेश शासन

सामान्य प्रसासन विभाग

क्रमाांक - 22742-सी. आर. 238-एक (3) ददनाांक - 16-10-1968

विषय- शासकीय सेिकों का स्थानापन्न वनयुवियों से प्रत्यािर्तन-सांविधान के अनुच्छेद 311 (2) का लागू

होना।

सन्दभत- इस विभाग का ज्ञापन क्र, 71-3727-एक (3)-65, र्ारीख 7 जनिरी सन् 1966।

इस विभाग के ऊपर बर्लाये गये ज्ञापन में अवधकवथर् दकये गये अनुदेशों की ओर ध्यान आकर्षतर् दकया जार्ा

है। यह देखा गया है दक इन अनुदेशों का अवधकाांश विभागों द्वारा उविर् रूप से वनितहन नहीं दकया गया है

वजसके पररणामस्िरूप कु छ मामलों में प्रत्यािर्तन विभागीय जााँि जो दक भारर् के सांविधान के अनुच्छेद 311

(2) द्वारा अपेविर् है, दकये वबना अदिर्ा, अििार या उपेिा के विवशष्ट आधारों पर दकये गये हैं, अपनी इस

कायतिाही के समथतन में उनकी ओर से यह दलील दी जार्ी है क्योंदक प्रत्यािर्तन के आदेश में प्रत्यािर्तन के

कारण का उल्लेख नहीं दकया गया है, अर्: यह आिश्यक नहीं है दक सांविधान के अनुच्छेद 311 (2) के अधीन

अपेविर् प्रदक्रया का अनुसरण दकया जाये। इस प्रकार की व्याख्या दकसी भी आधार पर मान्य नहीं की जा

सकर्ी।

2. इस विभाग के ज्ञापन क्र. 69-3727-एफ (3)-65, र्ारीख 7 जनिरी सन् 1966 के पैरा 4 में विवधक

वस्थवर् का विश्लेषण दकया गया है। जब कोई शासकीय सेिक आगामी आदेश न होने र्क अस्थायी रूप से

वनयुि दकया जार्ा है र्ो वनयुवि प्रावधकारी को यह अवधकार रहेगा दक िह आगे आदेश देर्े हुए उसकी

(शासकीय सेिक की) सेिाएाँ दकसी भी समय समाप्त कर सके गा दकन्र्ु जहााँ सम्बवन्धर् शासकीय सेिक की

सेिा समावप्त िस्र्ुर्ः अििार, उपेिा, अदिर्ा या अन्य वनरहतर्ाओं पर आधाररर् हो, िहााँ यह कायतिाही

दावडिक मानी जायेगी और सांविधान का अनुच्छेद 311 (2) लागू होगा। यह सत्य है दक यदद सेिा समावप्त या

प्रत्यािर्तन वनयुर् आदेश के शब्दों के अनुसार है र्ो न्यायालय मामूली र्ौर पर मामले के गुणािगुणों पर

वििार नहीं करेगा, दकन्र्ु इससे यह अवभप्रेर् है है दक यदद सेिा समावप्त या प्रत्यािर्तन का आदेश दडि के रूप

में है र्ो न्यायालय उस पर गहराई से वििारण नहीं करेगा; विशेषर्: उस दशा में जबदक अजीदार यह

दृढ़र्ापूितक कहर्ा हो दक ऐसा विशेष अििार या उपेिा आदद के कारण ददया गया है। र्थावप, यदद ऐसा

आदेश सामान्य अनुपयुिर्ा पर आधाररर् है, र्ो न्यायालय वनविर् ही उस आदेश पर वििार नहीं करेगा

और न विभागीय जााँि के वलये ही जोर देगा।

3. शासकीय सेिक के आिरण से सम्बवन्धर् विवशष्ट ररपोर्त के कारण प्रत्यािर्तन या सेिा समावप्त और उसके

िररष्ठ अवधकाररयों द्वारा आांकी गई सामान्य अनुपयुिर्ा के कारण प्रत्यािर्तन या सेिा समावप्त के बीि प्रभेद

करना होगा। अदिर्ा या उपेिा के विवशष्ट आधार पर और सामान्य अनुपयुिर्ा में अत्यवधक सूक्ष्म अन्र्र

Couldn't preview file
There was a problem loading this page.

Page 2 of 2

है। र्थावप, यह प्रभेद िास्र्विक र्था र्ावत्िक है। उदाहरणाथत सामान्य अनुपयुिर्ा दकसी समयािवध में दकये

गये उसके (शासकीय सेिक के ) कायत के बारे में उसके िररष्ठ आदफसरों की उन ररपोर्ीं पर आधाररर् रहर्ी है

जो दक सम्बवन्धर् शासकीय सेिक की अनुपयुिर्ा के बारे में उनके द्वारा (िररष्ठ आदफसरों द्वारा) दकये गये

मूल्याांकन को प्रकर् करर्ी है, िास्र्विक अििार या कृ र्ाकृ र् सम्बन्धी कु छ कायााँ की आकवस्मक ररपोर्त,

विवशष्ट अििार या अदिर्ा अथिा उपेिा के रूप में मानी जा सकर्ी है। यदद दकसी शासकीय सेिक को

उसके विवशष्ट अििार या उपेिा के कारण या उसी प्रकार के अन्य कारणों से प्रत्यािर्र्तर् दकया जाना है, र्ो

समुविर् विभागीय जााँि, जो दक अनुच्छेद 311 (2) में अपेविर् है, आिश्यक होगी।

4. जहााँ सामान्य अनुपयुिर्ा के आधार पर प्रत्यािर्तन दकया गया हो, और यदद प्रत्यािर्तन आदेश के विरुद्ध

कोई अभ्यािेदन दकया जाये, िहााँ िररष्ठ प्रावधकारी के वलये यह िाांछनीय होगा दक िह उसे ग्रहण करे। उसका

समाधान हो जाने र्क उसके द्वारा इस बार् की परीिा की जानी िावहये दक अनुपयुिर्ा के आधार पर दकसी

व्यवि को प्रत्यािर्र्तर् करने के वलये दकया गया विवनविय उविर् था। दकसी शासकीय सेिक को उनकी

सामान्य अनुपयुिर्ा के आधार पर प्रत्यािर्र्तर् करने के पूित सही प्रदक्रया यह होगी उस मामले को विभागीय

पदोन्नवर् सवमवर् के समि रखा जाये। वनयुवि प्रावधकारी को इस सम्बन्ध में सवमवर् द्वारा की गई वसफाररश

पर वििार करने के पिार्् ही विवनिय करना िावहए। 5. भविष्य में, समस्र् वनयुवि प्रावधकाररयों द्वारा,

उन शासकीय सेिकों के वजन्हें दकसी पद पर स्थानापन्न रूप में कायत करने के वलये अस्थायी रूप से वनयुि

दकया गया है, प्रत्यािर्तनों या सेिा समावप्त के मामलों में कायतिाही करर्े समय उपयुति अनुदेशों का अनुसरण

दकया जाना िावहए।